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बुंदेलखंड का सच


बुंदेलखंड का सच इतना भयावह है कि आप सुनकर चौक जाएंगे। यहां पड़ रहे सूखे से लोग हलकान है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। घरों में शादी करने के लिए बेटी जवान बैठी है, लेकिन आर्थिक तंगी यहां के लोगों के लिए मौत का दरवाजा खोल रही है। उनके सामने आत्महत्या करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं हैं।  
राज्यसभा में उठा मामला
सपा के एक सदस्य ने बुंदेलखंड में लगातार पड रहे सूखे के कारण किसानों को हो रही परेशानी के साथ ही क्षेत्र के पिछड़ेपन का मुद्दा राज्यसभा में उठाया और वहां के विकास के लिए 50 हजार करोड रूपए के विशेष पैकेज की मांगा है। ये मुद्दा उठाने वाले  सपा के विशम्भर प्रसाद निषाद है, जिन्होंने  एक निजी संकल्प पेश करते हुए कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में लगातार भयंकर सूखे के कारण फसलों की उपज निरंतर कम होती जा रही है। उन्होंने कहा कि खेती के घाटे का सौदा हो जाने के कारण किसान रोजगार की तलाश में लगातार पलायन कर रहे हैं। इसके अलावा जंगली जानवरों के कारण भी उनकी बची खुची फसलें बर्बाद हो रही हैं। उन्होंने क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत होने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को वहां इसकी पर्याप्त आपूर्ति पर गौर करना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में किसानों की सुरक्षा के साथ ही लघु एवं कुटीर उद्योग की स्थापना पर बल दिए जाने की भी मांग की।
     

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