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50 करोड़ का मालिक है सॉल्वर गैंग का सरगना अरविन्द राणा

सॉल्वर गैंग का जन्म डेढ़ दशक पहले उत्तर प्रदेश के बड़ौत(बागपत) कस्बे में हुआ था। बड़ौत की खत्री गढ़ी में अरविन्द राणा नामक युवक कोचिंग सेंटर चलता था,वहीं से अरविन्द ने पहले परीक्षा के पेपर आउट कराये, फिर इसके बाद सॉल्वर को परीक्षा में बैठाया गया। इलेक्ट्रिक तकनीक भी इसमें प्रयोग की। इस तरह से देखते ही देखते अरविन्द राणा सॉल्वर गैंग का सरगना बन गया। देश भर में उसने बड़ा रैकेट तैयार कर लिया। बिहार, यूपी, हरियाणा, केन्द्र सरकार की परीक्षाएं हो, सभी में इस गिरोह ने घुसपैठ कर ली। इस गिरोह के पचास से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी पुलिस कर चुकी है। कई आॅफिसर पद पर कार्यरत होने के बाद भी इस गिरोह को संचालित कर रहे थे, जिसमें पिछले दिनों बागपत के बाजिदपुर में कस्टम विभाग के ए-क्लास के आॅफिसर को भी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। गिरोह व्यापक स्तर पर सरकारी जॉब दिलाने में पकड़ बनाता चला गया। गिरोह सरगना अरविन्द राणा के खिलाफ चालीस से ज्यादा मुकदमें दर्ज है, मगर उसको पुलिस डेढ़ दशक बाद भी गिरफ्तार नहीं कर सकी। अरविन्द ने पुलिस विभाग में भी बड़ी तादाद में दारोगा व सिपाही भर्ती कराये है, जिनसे गहरी घुसपैठ बनी हुई है। यही वजह है कि अरविन्द पुलिस गिरफ्तारी से बचता आ रहा है। पचास करोड़ से ज्यादा की सम्पत्ति अरविन्द के पास है,मगर अरविन्द इतना शातिर है कि उसके नाम एक भी सम्पत्ति नहीं है। अपने परिवार व रिश्तेदारों के नाम पर सम्पत्ति करा रखी है। इसकी पुष्टि सॉल्वर गिरोह पर काम कर रहे पुलिस अफसरों ने भी की है। सॉल्वर गैंग के जिन चार सदस्यों को पुलिस ने शनिवार को पकड़ा है,उनके तार भी अरविन्द से जुड़े होने की बात कही जा रही है। चंडीगढ़ निवासी जयवीर सॉल्वर गिरोह तो चला रहा था, मगर इसके पीछे अरविन्द का मास्टर माइंड है। अब अरविन्द है कहां? यह किसी को कुछ नहीं पता है। डेढ़ दशक से अरविन्द पुलिस के निशाने पर है, फिर भी गिरफ्तारी संभव नहीं हो सकी।

राणा के गैंग को पुलिस क्यों नहीं कर पा रही नेस्तानाबूत
वेस्ट यूपी में अरविंद राणा गैंग के नेटवर्क को पुलिस नेस्तानाबूत नहीं कर पा रही है। राणा से जुड़े सॉल्वर गैंग के दो  विपिन डागरा निवासी डिडार मुरादनगर गाजियाबाद और विदवेश कुमार निवासी 114 ग्रेटर पल्लवपुरम (करनावल, सरूरपुर) को गिरफ्तार किया जा चुका है। विदवेश फलावदा में जनता इंटर कॉलेज में शिक्षक था, जबकि उसका साथी विपिन सीसीएसयू का छात्र नेता बताया गया। नामजद आरोपी राणा और उसके साथी पवन नैन की तलाश की जा रही है। वर्ष 2018 से की जा रही है,मगर अरविन्द राणा को पुलिस नहीं तलाश पाई।

आठ लाख लेकर कराया था पेपर आउट
इस गिरोह ने आठ लाख रुपये लेकर पेपर आउट कराया  था। पुलिस ने तब दावा कि था कि आरोपी परीक्षा माफिया अरविंद राणा का रिश्तेदार है। सरकारी तंत्र में नकल कराने में राणा गैंग का नेटवर्क है। इसकी जानकारी पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को भी है। इसके बावजूद पुलिस उनका नेटवर्क नहीं तोड़ पायी। तत्कालीन एसपी सिटी रणविजय सिंह ने बताया कि आरोपी विदवेश कुमार उर्फ बिल्ला मूल निवासी करनावल है। कई अभ्यर्थियों से एडवांस में पैसा लेकर राणा को दिया गया था। पांच लोगों को आरोपियों ने मेरठ में डिवाइस उपलब्ध कराई, जिसका उन्होंने परीक्षा में प्रयोग किया था। 

फर्जी आधार कार्ड भी बनाये जाते थे
सहारनपुर कोतवाली पुलिस ने बागपत के अमीनगर सराय से साइबर कैफे संचालक को साल्वर गैंग के लिए फर्जी आधार कार्ड, पहचान पत्र बनाने के आरोप में गिरफ्तारी की गई थी। बागपत के अमीनगर सराय में पाठक डॉट नेट नाम से चल रहे साइबर कैफे पर छापा मारा था। तब  पुलिस कैफे संचालक भवेंद्र पाठक को पकड़कर सहारनपुर ले गई थी।

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