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पीएम आवास योजना का बंटाधार!


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लोगों को आवास देने का ड्रीम प्रोजेक्ट हैं, लेकिन इस प्रोजेक्ट में भी भ्रष्टाचार हो रहा हैं। ऐसा ही एक मामला पश्चिमी यूपी के सहारनपुर जनपद का सामने आया है, जिसमें डूडा के परियोजना अधिकारी ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर पहले तो परियोजना अधिकारी का पद हथियाया, ​फिर घोटाला कर दिया। देखा जाए तो पीएम आवास योजना में भ्रष्टाचार चरम पर है।

 यही वजह है कि इसमें घोटाला करने के लिए फर्जी नियुक्ती तक लोग करा रहे हैं। इस बड़े फर्जीवाड़े में पर्दे के पीछे कौन हैं? चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के एक संविदा कर्मी ने किस तरह से सरकार में बैठे रसूखदारों से मिलकर किस तरह से फर्जीवाड़ा किया, फिर करीब 25 करोड़ का घोटाला कर दिया। घोटाला होने के बाद भी पीएम आवास को लेकर आला अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। आखिर इसके पीछे कितना बड़ा महाखेल चल रहा था। दरअसल, सत्ता की हनक अनुज प्रताप दिखाते थे। 

अनुज प्रताद कैसे संविदा कर्मी से सहारनपुर के पीओ के पद तक पहुंच गया। कैसे उसकी तैनाती कर दी गई? जब प्रदेश में डूडा आॅफिस में तैनात होने वाले परियोजना अधिकारी(पीओ)की सीएम आॅफिस से सूची जारी हो रही थी, तब अंतिम क्षणों में अनुज प्रताप का नाम सूची में कैसे जुड़ा? यह भी बड़ा सवाल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि अनुज प्रताप की पहुंच बड़े स्तर पर थी। आखिर कौन लोग थे, जो इस फर्जीवाड़े को जानते हुए करा रहे थे। फर्जीवाड़ा किसी अन्य विभाग के लिए भी किया जा सकता था, लेकिन डूडा को ही क्यों चुना गया। क्योंकि डूडा वर्तमान में पीएम आवास का निर्माण करा रहा हैं, जिसमें करोड़ों का खेल चल रहा हैं। ऐसे तथ्य भी सामने आये है कि आदमी एक और भुगतान तीन-तीन बार पीएम आवास के हो चुके हैं। 

कुछ इस तरह से पीएम आवास में भी अनुज प्रताप ने घोटाला किया, जिसकी ग्राउंड स्तर पर जांच पड़ताल शासन स्तर से कराई जाती हैं तो इसमें निश्चित रूप से 25 करोड़ का घोटाला सामने आयेगा। क्या किये गये घोटाले की रकम को शासन वसूल पाएगा या फिर रसूखदार लोग फिर से अनुज प्रताप का बचाव करेंगे। फर्जीवाड़े से पीओ का पद हथियाने वाले अनुज प्रताप सहारनपुर परियोजना अधिकारी के पद पर तैनात थे। मुजफ्फरनगर का भी उन पर अतिरिक्त चार्ज था। इस दौरान व्यापक स्तर पर फर्जी तरीके से पीएम आवास अपत्रों को दिये गए। इसमें क्या-क्या खेल हुआ, इसकी कलई किसी बड़ी जांच एजेंसी से जांच होने के बाद ही सामने आ सकती हैं। 

कौन है अनुज प्रताप ? 

अनुज प्रताप सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज में संविदा कर्मी के रूप में तैनात थे। अनुज ने पहले शासन में सेटिंग की, फिर प्रतिनियिुक्ति हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज बनाये। इसके बाद ही पूरा खेल चालू हुआ। अनुज मूल रूप से अलीगढ़ का रहने वाला है तथा वर्तमान में रामबाग कॉलोनी मेरठ में परिवार के साथ रह रहा हैं। एबीवीपी का नेता भी रहा हैं। चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय छात्र संघ का चुनाव लड़ा, जिसमें उपाध्यक्ष भी रहा। इसके बाद एबीवीपी और भाजपा में उसके गहरे रिश्ते बन गए। भाजपा के बड़े नेताओं से उसके अंतरंग रिश्ते भी हैं। जनवाणी के पास उसके कई ऐसे फोटो भी हैं, जो बड़े भाजपा नेताओं के साथ हैं। 2019 में अनुज ने प्रतिनियुक्ति ली थी, जो फर्जी दस्तावेज के बदले सब घालमेल हुआ। 

क्यों नहीं हो रही गिरफ्तारी ? 

आखिर अनुज प्रताप के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार कर सूडा के अधिकारी बनने के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी आखिर पुलिस उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं कर रही हैं? शुक्रवार और शनिवार को भी अनुज प्रताप मेरठ में ही देखे गए, फिर भी पुलिस उसे क्यों नहीं पकड़ रही हैं? कुछ रसूखदारों से अनुज की दोस्ती के चलते ही पुलिस ने हथियार डाल दिये हैं। यदि ऐसा मामला किसी अन्य का हुआ होता तो शायद पुलिस कभी की गिरफ्तारी कर चुकी होती। रसूखदार अनुज के बचाव में उतर गए हैं। पुलिस के आला अफसरों पर भी लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि अनुज की गिरफ्तारी नहीं हो तथा यह पूरा घोटाला ही पेडिंग डाल दिया जाए। 


 

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